विष दोष पूजा उज्जैन
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विष दोष क्या है और यह योग कुंडली मे कैसे बनता है?
ज्योतिष में विष दोष (विष योग) तब माना जाता है जब किसी की जन्मकुंडली में शनि और चंद्रमा एक ही राशि या भाव में साथ बैठे हों, या एक-दूसरे पर दृष्टि डाल रहे हों। चंद्रमा को मन का कारक और शनि को अनुशासन, कठोरता और देरी का कारक माना जाता है। इसलिए मान्यता है कि इस योग में मन भारी रहना, निर्णय लेने में उलझन और कार्यों में विलंब जैसी स्थितियाँ बन सकती हैं।
कुंडली के किस भाव में यह युति बन रही है और उस पर अन्य ग्रहों की दृष्टि कैसी है, इसके अनुसार इसका प्रभाव अलग माना जाता है। इसी कारण पूजा से पहले जन्मकुंडली दिखवाना अच्छा रहता है। कई ज्योतिषी शनि की साढ़ेसाती या ढैया के समय भी इस योग पर विशेष ध्यान देते हैं।
विष दोष के संकेत (Symptoms of Vish Dosh)
मानसिक तनाव और चिंता हमेशा बनी रहना
बार-बार रोग होना, विशेष रूप से मानसिक या तंत्रिका संबंधी
वैवाहिक जीवन में लगातार तनाव
संतान प्राप्ति में बाधा
व्यापार या नौकरी में रुकावट
नींद न आना या डरावने सपने आना
कोई भी कार्य आरंभ करते ही विफल हो जाना
विष दोष दूर करने के उपाय
- ज्योतिषीय उपाय: ग्रहों की शांति हेतु विशेष मंत्र जाप, रत्न धारण, और अनुष्ठान
- दान और पूजा: राहु, केतु या शनि संबंधित वस्तुओं का दान
- विशेष पूजा: विष दोष निवारण पूजा उज्जैन जैसे तीर्थस्थलों में करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
विष दोष निवारण पूजा की विधि
परंपरा के अनुसार विष दोष शांति पूजा में शनि और चंद्र देव की प्रसन्नता के लिए अनुष्ठान किया जाता है। स्थान और परंपरा के अनुसार क्रम में थोड़ा अंतर हो सकता है, पर सामान्य रूप से ये चरण होते हैं:
- संकल्प: यजमान अपना नाम, गोत्र और पूजा का उद्देश्य बोलकर संकल्प लेते हैं।
- गणेश पूजन और कलश स्थापना: शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन और कलश स्थापना से होती है।
- शनि और चंद्र पूजन: शनि देव और चंद्र देव का आवाहन कर विधिवत पूजन किया जाता है।
- मंत्र जाप: शनि और चंद्र के बीज मंत्रों के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है।
- शिव अभिषेक: चंद्र देव भगवान शिव के मस्तक पर विराजते हैं, इसलिए जल और दूध से शिव अभिषेक को शुभ माना जाता है।
- हवन, पूर्णाहुति और आरती: अंत में हवन, पूर्णाहुति और आरती के साथ पूजा संपन्न होती है।
पूजा में उपयोग होने वाली सामान्य सामग्री
परंपरा में विष दोष शांति पूजा के लिए आम तौर पर काले तिल, सरसों का तेल, जल और दूध, बेलपत्र, चावल, घी, फूल, धूप-दीप और हवन सामग्री का उपयोग होता है। शनि देव की पूजा में नीले या काले रंग की वस्तुएँ और चंद्र देव की पूजा में सफेद वस्तुएँ चढ़ाने की परंपरा है। सामग्री की सूची पंडित जी पूजा तय होने पर आपको बता देते हैं।
घर पर अपनाए जाने वाले सरल आस्था-आधारित उपाय
पूजा के साथ कुछ लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार ये सरल उपाय भी करते हैं:
- सोमवार को शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
- शनिवार की शाम पीपल के वृक्ष के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
- जरूरतमंद लोगों को काले तिल, कंबल या भोजन का दान करें।
- रोज़ सुबह कुछ देर शांत बैठकर ध्यान या प्राणायाम करें, जिससे मन को स्थिरता मिलती है।
ये सुझाव आस्था और परंपरा पर आधारित हैं। आपकी कुंडली के अनुसार कौन-सा उपाय उपयुक्त रहेगा, यह पंडित जी से पूछ सकते हैं।
उज्जैन में विष दोष शांति पूजा का महत्व
उज्जैन भगवान महाकालेश्वर की नगरी है और पवित्र शिप्रा नदी के तट पर बसी है। शनि और चंद्र दोनों की शांति के लिए भगवान शिव की आराधना को श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए श्रद्धालु इस पावन नगरी में विष दोष की पूजा कराना पसंद करते हैं। पंडित मंगलेश शर्मा जी लंबे अनुभव के साथ यह अनुष्ठान विधि-विधान से कराते हैं।
आप चाहें तो इसके साथ महामृत्युंजय मंत्र जाप, रुद्राभिषेक या नवग्रह शांति पूजा भी करा सकते हैं। सही सलाह के लिए संपर्क पेज से या सीधे फोन पर पंडित जी से बात करें।
शनि और चंद्र की दशा में विष दोष का महत्व
ज्योतिष की मान्यता है कि किसी ग्रह का प्रभाव उसकी महादशा और अंतर्दशा के समय अधिक अनुभव होता है। जिन लोगों की कुंडली में शनि और चंद्र की युति होती है, उन्हें इन ग्रहों की दशा के समय अपनी कुंडली का विशेष विश्लेषण कराने की सलाह दी जाती है। चंद्रमा का संबंध मन, भावनाओं और माता से तथा शनि का संबंध कर्म, परिश्रम और धैर्य से माना गया है।
इसलिए इस योग को केवल कठिन नहीं, बल्कि धैर्य और परिश्रम से आगे बढ़ने की सीख देने वाला योग भी माना जाता है। नियमित पूजा-पाठ, शिव आराधना और सकारात्मक सोच के साथ लोग अपने जीवन में संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं।
विवाह के लिए कुंडली मिलान के समय भी वर-वधू की कुंडली में शनि और चंद्र की स्थिति देखी जाती है। विष दोष मंगल दोष से अलग योग है, इसलिए दोनों का विश्लेषण अलग-अलग किया जाता है। अपनी कुंडली के सटीक विश्लेषण के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान के साथ पंडित जी से संपर्क करें।
विष दोष पूजा से जुड़े सामान्य प्रश्न
कुंडली में विष दोष है या नहीं, यह कैसे पता चलता है?
जन्मकुंडली में शनि और चंद्रमा की स्थिति देखकर ज्योतिषी इसे बताते हैं। आप अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान के साथ पंडित जी से कुंडली दिखवा सकते हैं।
विष दोष की पूजा किस दिन करानी चाहिए?
परंपरा में शनिवार और सोमवार को शनि और चंद्र की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। अंतिम तिथि पंचांग और कुंडली देखकर तय की जाती है।
पूजा में कितना समय लगता है और खर्च कितना आता है?
समय और खर्च पूजा के स्वरूप, पंडितों की संख्या और सामग्री पर निर्भर करते हैं। पंडित जी बुकिंग के समय आपको स्पष्ट जानकारी दे देते हैं।
पूजा उज्जैन में किस स्थान पर होती है?
पूजा का स्थान आपकी सुविधा और पंडित जी की सलाह के अनुसार तय होता है। इसकी जानकारी फोन पर ले सकते हैं।
बुकिंग कैसे करें?
नीचे दिए बटन पर क्लिक करके या 9827265140 पर कॉल करके पंडित जी से सीधे बात करें।
उज्जैन मे विष दोष पूजा बुक कराये!
पंडित जी के पास वर्षभर विष दोष पूजा के लिए लोग उज्जैन आते है, और दोष से आ रही जीवन की समस्याओ और बाधाओ से छुटकारा पाते है। अगर आप भी उज्जैन मे विष दोष निवारण पूजा करवाना चाहते है, तो नीचे दी गई बटन पर क्लिक करके पंडित जी से बात कर सकते है।