शनि-मंगल द्वंद्व दोष: ग्रह-युति की ज्योतिषीय विवेचना
ज्योतिष में दो ग्रहों की प्रकृति एक-दूसरे से पूरी तरह उल्टी है। एक कहता है — रुको, धैर्य रखो, समय आने दो। दूसरा कहता है — अभी करो, प्रहार करो, देर मत करो। पहला है शनि — धैर्य, न्याय और सेवक-भाव का ग्रह, वायु-तत्व प्रधान, स्थिर और धीमा। दूसरा है मंगल — ऊर्जा, साहस और…