नवग्रह शांति पूजा मुहूर्त 2026

नवग्रह शांति पूजा मुहूर्त 2026: जाने विधि, शुभ तिथि और लाभ

नवग्रह शांति पूजा एक ऐसा वैदिक अनुष्ठान है जो अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है। यह पूजा न केवल ग्रह दोषों का निवारण करती है, बल्कि मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करती है। और जब यह पूजा सही मुहूर्त में की जाए तो ओर भी अधिक फलदायी मानी जाती है।

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नवग्रह शांति पूजा मुहूर्त 2026: जाने विधि, शुभ तिथि और लाभ

नवग्रह शांति पूजा किसी भी व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक बार अवश्य करानी चाहिए – चाहे कुंडली में दोष हो या न हो। यह पूजा जीवन के सभी क्षेत्रों में ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है तथा उज्जैन में नवग्रह शांति पूजा कराने पर इस पूजा का महत्व ओर भी आधी बढ़ जाता है।

ग्रहों की शांति क्यों जरूरी है?

हमारे जीवन में सुख-दुख, उन्नति-अवनति और सफलता-असफलता का गहरा संबंध नवग्रहों की स्थिति से है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में नौ ग्रह – सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु – अपनी-अपनी महादशाओं और अंतर्दशाओं के अनुसार व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। जब कोई ग्रह नीच राशि में हो, अशुभ भाव में हो, या शत्रु ग्रह की दृष्टि में हो, तब उस ग्रह की अशुभ दशा व्यक्ति के जीवन में अनेक कष्ट उत्पन्न करती है।

नवग्रह कौन हैं?

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों को जीवन के नौ आयामों का प्रतिनिधि माना गया है। प्रत्येक ग्रह एक विशेष देवता, रत्न, रंग और दिन से जुड़ा है। नीचे की तालिका में नवग्रहों का सार प्रस्तुत है:

नवग्रहों के प्रभाव कौन-कौन से होते है?

  1. सूर्य – आत्मविश्वास, नेतृत्व, सम्मान और सरकारी सफलता को प्रभावित करता है।
  2. चंद्र – मन, भावनाएँ, मानसिक शांति और सोचने की क्षमता पर प्रभाव डालता है।
  3. मंगल – साहस, ऊर्जा, क्रोध, भूमि और वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है।
  4. बुध – बुद्धि, शिक्षा, व्यापार और संचार कौशल को नियंत्रित करता है।
  5. गुरु – ज्ञान, भाग्य, धर्म, शिक्षा और मार्गदर्शन पर प्रभाव डालता है।
  6. शुक्र – प्रेम, विवाह, सुख-सुविधाएँ और आकर्षण को प्रभावित करता है।
  7. शनि – कर्म, संघर्ष, देरी, अनुशासन और स्थिरता का कारक है।
  8. राहु – भ्रम, अचानक घटनाएँ, विदेशी संबंध और भौतिक इच्छाओं को प्रभावित करता है।
  9. केतु – आध्यात्म, वैराग्य, अंतर्ज्ञान और मोक्ष की ओर ले जाता है।

जीवन में दिखने वाले लक्षण

⦁ बार-बार काम बनते-बनते बिगड़ जाना और मेहनत का फल न मिलना
⦁ विवाह में अत्यधिक विलंब या दांपत्य जीवन में अशांति
⦁ संतान संबंधी समस्याएं या बच्चों का स्वास्थ्य खराब रहना
⦁ व्यापार में लगातार घाटा या नौकरी में प्रमोशन न होना
⦁ घर में बार-बार कलह, चोरी या दुर्घटनाएं
⦁ स्वास्थ्य संबंधी पुरानी समस्याएं जो दवाओं से भी ठीक न हों
⦁ रात को अजीब सपने आना या मानसिक बेचैनी

यदि आप अपनी जन्म कुंडली नहीं जानते, तो पंडित मंगलेश शर्मा जी से संपर्क करें। वे जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर तत्काल कुंडली विश्लेषण करते हैं और उचित पूजा का सुझाव देते हैं।

नवग्रह शांति पूजा की शुभ तिथियाँ और मुहूर्त 2026 – जाने सम्पूर्ण जानकारी

वैदिक पंचांग, ग्रह-गोचर एवं नक्षत्र गणना के आधार पर पंडित मंगलेश शर्मा जी ने वर्ष 2026 के प्रमुख शुभ मुहूर्त निम्नानुसार निर्धारित किए हैं:

जनवरी- 13 जन – मकर संक्रांति। उत्तराषाढ़, 06:30–10:00 AM सूर्य संक्रांति विशेष पूजा
फरवरी- 26 फर – महाशिवरात्रि। शतभिषा रात्रि, 12–02 AM महाशिवरात्रि – अत्युत्तम
मार्च- 14 मार – होली पूर्णिमा। उत्तरा फा॰, 07:00–09:30 AM चंद्र ग्रहण से पहले पूजा
अप्रैल- 14 अप्र – सोमवती अमावस्या। अश्विनी, 06:00–10:00 AM वर्ष का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
अप्रैल- 6 अप्र – रामनवमी पुनर्वसु। 07:30–11:00 AM सूर्य पूजन विशेष
मई- 12 मई – वैशाख पूर्णिमा। विशाखा 05:45–08:30 AM बुध-गुरु युति लाभकारी
जून- 21 जून – ग्रीष्म संक्रांति। आर्द्रा 06:00–09:00 AM सूर्य उत्तरायण शिखर
जुलाई- 10 जुल – आषाढ़ी एकादशी। श्रवण, 07:00–10:30 AM गुरु जागरण दिवस
अगस्त- 19 अग – रक्षाबंधन। श्रवण, 06:30–09:00 AM चंद्र-शुक्र योग उत्तम
सितंबर- 7 सित – गणेश चतुर्थी। हस्त, 07:30–10:00 AM बुध + गुरु की विशेष दृष्टि
अक्तूबर- 2 अक्त – नवरात्र प्रारंभ। उत्तरा फा॰, 06:00–08:30 AM नवग्रह + नवदुर्गा पूजन
नवंबर- 15 नव – कार्तिक पूर्णिमा। रोहिणी, 05:30–08:00 AM त्रिपुष्कर योग
दिसंबर- 11 दिस – मोक्षदा एकादशी। अनुराधा, 07:00–09:30 AM मोक्ष दायक नवग्रह पूजन

वर्ष 2026 के तीन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

  • प्रथम श्रेष्ठ: 14 अप्रैल 2026 – सोमवती अमावस्या + मेष संक्रांति + सोमवार का अद्भुत संगम। नवग्रह शांति पूजा का इस दिन फल 1000 गुना माना जाता है।
  • द्वितीय श्रेष्ठ: 26 फरवरी 2026 – महाशिवरात्रि। भगवान शिव के दिन नवग्रह पूजन से ग्रह दोष का समूल नाश होता है।
  • तृतीय श्रेष्ठ: 2 अक्तूबर 2026 – नवरात्र प्रारंभ। नवदुर्गा + नवग्रह का एक साथ पूजन अत्यंत फलदायी होता है।

मुहूर्त चयन के मुख्य सिद्धांत

  • तिथि – पंचमी, दशमी, त्रयोदशी, पूर्णिमा और अमावस्या विशेष शुभ
  • नक्षत्र – रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, श्रवण, उत्तराषाढ़, पुष्य
  • वार – सोमवार (चंद्र), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु) विशेष
  • लग्न – स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में पूजा शुरू करें
  • राहुकाल और भद्रा – इस समय पूजा प्रारंभ न करें
  • गुरु और शुक्र अस्त – इस काल में शुभ कार्य टालें

नवग्रह शांति पूजा की सम्पूर्ण विधि क्या है?

  • स्नान और संकल्प
  • गणेश पूजन
  • नवग्रह स्थापना
  • नौ ग्रहों का व्यक्तिगत पूजन
  • नवग्रह मंत्र जाप
  • हवन (अग्नि होम)
  • पूर्णाहुति, आरती और दान
  • प्रसाद वितरण करें। ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा प्रदान करें। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराने से पूजा का फल अक्षय होता है।

नवग्रह शांति पूजा की लागत – जाने पूजा में कितना खर्च आता है?

पूजा पैकेज अवधि और सामग्री के अनुसार अनुमानित लागत:-
सामान्य नवग्रह पूजा 1–2 घंटे मूल सामग्री पंडित द्वारा ₹ 1,100 – ₹ 2,500
नवग्रह + रुद्राभिषेक 3–4 घंटे विस्तृत पूजन सामग्री ₹ 3,100+
महानवग्रह शांति (हवन सहित) 5–6 घंटे पूर्ण सामग्री + हवन ₹ 4,000+
नवग्रह यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा 2–3 घंटे नवग्रह यंत्र + पूजन ₹ 5,000+

उज्जैन में व्यक्तिगत रूप से और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से पूजा करवाते हैं। संपर्क करने पर बजट के अनुसार उचित पूजा खर्च बताया जाता है। दिया गया खर्च अनुमानित है पूजा के सटीक खर्च की जानकारी के लिए आज ही पंडित जी से संपर्क करें।

नवग्रह शांति पूजा की आवश्यकता कब होती है?

निम्नलिखित परिस्थितियों में नवग्रह शांति पूजा तत्काल कराना आवश्यक है:
⦁ जब कुंडली में कोई ग्रह नीच राशि (debilitated) में हो
⦁ जब राहु-केतु की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो
⦁ जब शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो
⦁ जब दो या अधिक ग्रह एक ही भाव में युति में हों
⦁ जब जन्म कुंडली में सूर्य और शनि की परस्पर दृष्टि हो
⦁ जब मंगल दोष, गुरु दोष या शुक्र अस्त की स्थिति हो

नवग्रह शांति पूजा के चमत्कारी लाभ कौन-कौन से है?

⦁ रुकी हुई नौकरी और प्रमोशन में फिर से गति आती है
⦁ बुध ग्रह की शांति से व्यावसायिक बातचीत और अनुबंध सफल होते हैं
⦁ शुक्र ग्रह की शांति से विवाह के अवरोध दूर होते हैं
⦁ दांपत्य जीवन में मधुरता और सामंजस्य बढ़ता है
⦁ गुरु ग्रह की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है
⦁ सूर्य ग्रह की शांति से हृदय और आँखों की बीमारी में राहत
⦁ चंद्रमा की शांति से मन की बेचैनी, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होता है
⦁ मंगल की शांति से रक्त संबंधी रोगों में सुधार
⦁ शनि ग्रह की शांति से ‘कर्म’ सिद्धांत के अनुसार उचित फल मिलता है
⦁ गुरु की कृपा से धन संपत्ति में वृद्धि
⦁ राहु-केतु की शांति से अचानक आर्थिक नुकसान से रक्षा

पूजा के बाद के नियमित उपाय क्या है?

पूजा के बाद इन सरल उपायों को नियमित रूप से करें ताकि ग्रह शांति का प्रभाव दीर्घकालिक रहे:
⦁ प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्घ्य दें और गायत्री मंत्र का 11 बार जाप करें
⦁ सोमवार को शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र चढ़ाएं
⦁ मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं
⦁ बुधवार को भगवान विष्णु की पूजा और तुलसी जल अर्पण करें
⦁ गुरुवार को केले का पेड़ लगाएं और केले का भोग गुरु को लगाएं
⦁ शुक्रवार को माता लक्ष्मी को सफेद फूल और खीर का भोग लगाएं
⦁ शनिवार को पीपल के वृक्ष पर सरसों तेल का दीपक जलाएं
⦁ प्रत्येक माह की अमावस्या को पितरों का तर्पण और दान करें

उज्जैन में नवग्रह शांति पूजा बुकिंग के लिए संपर्क कैसे करें?

नवग्रह का प्रभाव हमारे जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ता है। यदि ग्रह शुभ स्थिति में हों तो जीवन में सुख, सफलता और शांति मिलती है, लेकिन अशुभ स्थिति में समस्याएँ और बाधाएँ आ सकती हैं।

क्या आपके जीवन में भी समस्याएँ आ रही है तो पंडित जी से संपर्क करें कुंडली की जांच कराएँ और दोष निवारण पूजा सम्पन्न कराएँ। पूजा बुकिंग के लिए अभी कॉल करें और पूरी जानकारी प्राप्त करें।

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