मंगल केतू अंगारक दोष क्या है?

मंगल केतू अंगारक दोष क्या है? जाने लक्षण और उपाय 2026

वैदिक ज्योतिष में अंगारक दोष (Angarak Dosh) तब बनता है जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह और केतु (दक्षिण चंद्र नोड / South Node) आपस में एक ही राशि में युति (conjunction) करते हैं, या एक-दूसरे पर अपनी दृष्टि डालते हैं। कुछ विद्वान मंगल-राहु की युति को भी अंगारक दोष मानते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार मंगल-केतु का संयोग ‘विशिष्ट अंगारक दोष‘ कहलाता है।

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अंगारक दोष क्या है? विशेषता और महत्व

मंगल केतू अंगारक दोष
मंगल केतू अंगारक दोष क्या है? जाने लक्षण और उपाय 2026

‘अंगारक’ शब्द का अर्थ है — ‘अंगारे की तरह जलाने वाला’। मंगल ग्रह स्वयं अग्नि तत्व का प्रतिनिधि है, और केतु भी मंगल की तरह अग्नि तत्व, क्रूर स्वभाव और अप्रत्याशित परिणामों वाला ग्रह है। जब ये दोनों मिल जाते हैं, तो एक अग्नि-ज्वाला जैसा योग बनता है जो व्यक्ति के जीवन को अंदर से जलाता रहता है।

मंगल-केतु अंगारक दोष व्यक्ति के जीवन में क्रोध, दुर्घटना, कोर्ट केस, वैवाहिक तनाव और करियर समस्याएँ ला सकता है। लेकिन सही समय पर पूजा, मंत्र जाप और उचित उपाय करने से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेष रूप से उज्जैन की अंगारक दोष पूजा को अधिक प्रभावशाली माना जाता है।

अंगारक दोष के दो रूप — मंगल-राहु और मंगल-केतु

  • मंगल-केतु अंगारक दोष: मंगल + केतु। क्रोध, दुर्घटना, रहस्यमय रोग, आध्यात्मिक बाधा ये सभी इस दोष के प्रभाव है। यह दोष अत्यधिक तीव्र होता है।
  • मंगल-राहु अंगारक दोष: मंगल + राहु। इस दोष के प्रभाव से भ्रम, धोखा, धन हानि, विदेश में समस्याएं होती है। यह दोष तीव्र प्रभाव का होता है।
  • मंगल-राहु-केतु: (तीनों) तीनों एक साथ जीवन के सभी क्षेत्रों पर गहरा असर करते है। इस दोष का प्रभाव अत्यंत दुर्लभ, सर्वाधिक तीव्र हो सकता है।

अंगारक दोष के बारे में क्या कहते हैं ग्रंथ?

बृहत्पाराशर होराशास्त्र में मंगल को ‘क्रूर ग्रह’ और केतु को ‘मंगल का अनुज’ कहा गया है — दोनों का स्वभाव एक जैसा है। जब दो एक स्वभाव के क्रूर ग्रह मिलते हैं तो उनका प्रभाव दोगुना हो जाता है। ज्योतिष सार संग्रह के अनुसार: ‘अंगारकस्य युतिः केतुना यदा, नरः सदा कोपवशे निमग्नः’ — अर्थात जिसकी कुंडली में मंगल और केतु की युति हो, वह व्यक्ति सदा क्रोध के वश में रहता है।

लाल किताब में अंगारक योग को ‘पागल हाथी’ की संज्ञा दी गई है — बेलगाम, शक्तिशाली और विनाशकारी। इसलिए इस दोष को समय पर पहचानना और निवारण करना अत्यंत आवश्यक है।

मंगल केतू अंगारक दोष के लक्षण — क्या आपको भी ये संकेत मिल रहे हैं?

अंगारक दोष के लक्षण जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से प्रकट होते हैं। यदि आपको नीचे दिए गए 7 या उससे अधिक लक्षण मिल रहे हों, तो तुरंत कुंडली का अध्ययन करवाएं:

मानसिक और स्वभावगत लक्षण

⦁ असामान्य और अनियंत्रित क्रोध — छोटी बात पर आपा खो देना, बाद में पछताना
⦁ बिना कारण की बेचैनी, मन में हमेशा एक अजीब सी आग या घुटन
⦁ रात को अजीब और भयावह सपने आना, अग्नि से संबंधित दुःस्वप्न।

स्वास्थ्य संबंधी लक्षण

⦁ रक्त (Blood) से संबंधित रोग — एनीमिया, रक्तचाप, थक्के जमना
⦁ त्वचा रोग — बार-बार फोड़े-फुंसी, एग्जिमा, जलन वाली त्वचा समस्याएं
⦁ बुखार का बार-बार आना और लंबे समय तक ठीक न होना

पारिवारिक और सामाजिक लक्षण

⦁ छोटी बात पर पारिवारिक कलह — घर में बार-बार लड़ाई-झगड़ा
⦁ भाई-बहनों या करीबी रिश्तेदारों से विवाद और मनमुटाव
⦁ विवाह में अत्यधिक विलंब या वैवाहिक जीवन में कड़वाहट

करियर और आर्थिक लक्षण

⦁ कड़ी मेहनत के बावजूद करियर में रुकावट — प्रमोशन न होना
⦁ व्यापार में अचानक नुकसान या साझेदार का धोखा
⦁ कर्ज का बोझ बढ़ते जाना — पैसे आते हैं लेकिन टिकते नहीं

मंगल-केतु अंगारक दोष के उपाय क्या है?

  • हर मंगलवार हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा पढ़ें।
  • मंगल और केतु मंत्र जाप :-
  • “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”
  • “ॐ कें केतवे नमः”
  • यदि दोष अधिक गंभीर हो, तो विशेष अंगारक दोष शांति पूजा करानी चाहिए।
  • भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से इस दोष का प्रभाव कम होता है।
  • मंगलवार को मसूर दाल, लाल कपड़ा और गुड़ का दान करें।
  • इस दोष में व्यक्ति को गुस्सा और जल्दबाजी पर नियंत्रण रखना चाहिए।

अंगारक दोष शांति पूजा — सर्वोत्तम दोष निवारण उपाय

सभी उपायों में सबसे प्रभावशाली और स्थायी उपाय है — विधिवत अंगारक दोष शांति पूजा। पंडित मंगलेश शर्मा के अनुसार यह पूजा उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में करवाना सर्वोत्तम है, क्योंकि उज्जैन को मंगल ग्रह की जन्मभूमि माना जाता है।

अंगारक दोष पूजा की विधि क्या है?

  1. गणेश पूजन — सर्वप्रथम विघ्नहर्ता को प्रसन्न करें, मोदक और दूर्वा अर्पित करें
  2. संकल्प — अपना नाम, गोत्र और अंगारक दोष शांति का संकल्प लें
  3. मंगल देव का आह्वान — लाल फूल, लाल चंदन, गुड़, मसूर दाल अर्पित करें
  4. केतु पूजन — कुश, नारियल, तिल, सफेद फूल से केतु का पूजन
  5. मंगल-केतु मंत्र जाप — ‘ॐ अं अंगारकाय नमः’ 1008 बार हवन में आहुतियां
  6. हवन — चना दाल, गुग्गल, लाल चंदन, आम की लकड़ी, घी से हवन
  7. रुद्राभिषेक — मंगलनाथ शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक
  8. दान और दक्षिणा — लाल वस्त्र, तांबा, लाल मसूर पंडित जी को दें
  9. आरती और प्रसाद — पूजा का समापन।

उज्जैन में अंगारक दोष पूजा क्यों? — मंगलनाथ का विशेष महत्व

उज्जैन (अवंतिका) को वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह की जन्मभूमि माना गया है। स्कंद पुराण के अनुसार उज्जैन क्षेत्र पर मंगल ग्रह का विशेष प्रभाव है — यहाँ का क्षिप्रा नदी का तट और मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह की शांति के लिए सर्वोत्कृष्ट स्थान है।
⦁ मंगलनाथ मंदिर — यहाँ भगवान शिव का मंगल स्वरूप विराजमान है। मंगल दोष पूजा और अंगारक दोष की शांति यहाँ सबसे प्रभावशाली होती है
⦁ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग — 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। यहाँ रुद्राभिषेक से अंगारक दोष का समूल नाश होता है
⦁ सिद्धवट — पितृ तर्पण और ग्रह दोष शांति के लिए प्रसिद्ध
⦁ नागचंद्रेश्वर मंदिर — नाग पंचमी पर एक ही दिन खुलता है, विशेष पूजन स्थान

उज्जैन में मंगल-केतू अंगारक पूजा में कितना खर्च आता है?

  • सामान्य पूजा: ₹2,000 – ₹3,000
  • पूजा + हवन: ₹3,000 – ₹4,000
  • विस्तृत अनुष्ठान और मंदिर व्यवस्था: ₹5,000+

ऊपर दिया गया पूजा खर्च अनुमानित है पूजा के सटीक खर्च की जानकारी के लिए आज ही उज्जैन के अनुभवी पंडित मंगलेश शर्मा जी से संपर्क करें।

मंगल-केतु अंगारक दोष पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

  • अत्यधिक क्रोध और चिड़चिड़ापन कम होता है
  • बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं और चोट की संभावना घटती है
  • कोर्ट केस, पुलिस या कानूनी विवादों में राहत मिलती है
  • विवाह में देरी, झगड़े और रिश्तों की बाधाएँ कम होती हैं
  • नौकरी और व्यवसाय में स्थिरता आने लगती है
  • मानसिक तनाव, डर और बेचैनी कम होती है
  • अचानक धन हानि और आर्थिक रुकावटों में सुधार आता है।

उज्जैन में अंगारक दोष पूजा की बुकिंग कैसे करें?

पूजा बुकिंग की प्रक्रिया

  1. अपनी कुंडली या जन्म विवरण भेजें
  2. पंडित द्वारा अंगारक दोष की पुष्टि कराई जाती है
  3. मंगलवार, अमावस्या या उपयुक्त मुहूर्त चुना जाता है
  4. पूजा, हवन और रुद्राभिषेक की बुकिंग की जाती है
  5. यदि आप उज्जैन नहीं आ सकते, तो कई स्थान ऑनलाइन पूजा और लाइव वीडियो की सुविधा भी देते हैं

अंगारक दोष पूजा सामान्यतः मंगलनाथ मंदिर या अंगारेश्वर क्षेत्र में कराई जाती है, क्योंकि इन्हें मंगल ग्रह से जुड़ा प्रमुख स्थान माना जाता है। यदि आप भी उज्जैन में यह पूजा पूरी विधि के साथ सम्पन्न कराना चाहते है तो आज ही उज्जैन के योग्य पंडित मंगलेश शर्मा जी से नीचे दिये गए नंबर पर संपर्क करें और अपनी पूजा बुक करें।

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