बगलामुखी माता पूजा उज्जैन
माँ बगला मुखी की पूजा क्यों की जाती है?
प्राचीन तंत्रों मे दस महाविधाओ का वर्णन मिलता है। 1- काली, 2- तारा, 3- षोड़षी, 4- भुवनेश्वरी, 5- छिन्नमस्ता, 6- त्रिपुर, भैरवी, 7- धूमावती, 8- बगलामुखी, 9- मातंगी, 10- कमला। इन सभी महाविधाओ की पूजा आरधना करने का अपना अलग ही महत्व होता है। किन्तु इन सभी मे बगला मुखी माता को सबसे विशेष माना जाता है। शत्रुओ पर विजय प्राप्त करने, कोर्ट कचहरी मे जीतने, अपनी वाणी को प्रभावशाली बनाने के लिए बगला मुखी माता पूजा की जाती है।
बगला मुखी माता की पूजा करने के नियम-
बगला मुखी माता की उपासना के लिए की जाने वाली सामान्य या विशिष्ट पूजा मे भी इन नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है। इन नियमों का पालन करते हुए पूजा उपासना की जाए तो माँ बगला मुखी की कृपा से उपासक की मनोकामनाएँ पूर्ण होने की मान्यता है। माँ बगल मुखी की पूजा करने के नियम निम्नलिखित है-
- साधना काल मे ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- जब तक माँ की उपासना के लिए जीतने दिनों तक अनुष्ठान चले तब तक बाल नहीं कटवाने चाहिए।
- माता के विशिष्ट मंत्रों का जाप रात्रि 10 बजे से लेकर प्रातः 4 बजे तक ही करना चाहिए।
- साधना करते समय पीले रंग के वस्त्रों को धारण करना चाहिए।देसी गाय के घी से ही दीपक जलाए।
- दीपक की बाती को हल्दी मे रंगकर ही जलाए या तो पहले से ही बाती को हल्दी रंग मे सुखाकर रख ले मे सुखाकर रख ले।
- साधना करते समय जो यंत्र बनाए जाते है, उन्हे केवल चने की दाल से ही बनाया जाता है।
- माँ बगला मुखी की पूजा किसी सिद्ध पुरुष के साथ करने पूजा शीघ्र ही सफल हो जाती है।
- सामान्य जन को पूजा वाले दिन व्रत रखना चाहिए।
बगला मुखी माता की पूजा विधि-
- माँ बगला मुखी की पूजा करने वाले व्यक्ति को प्रातः नित्य कर्म करने के बाद पीले रंग के वस्त्रों को धारण करे।
- माता को पीले आसन पर विराजमान करे।
- माँ को विराजित करने के बाद माँ को पीले रंग के पुष्प, पीला चंदन और पीले रंग के वस्त्रों को अर्पण करे।
- माँ के समक्ष धूप, दीपक प्रज्ज्वलित करे।
- माँ बगला मुखी की आरती उतारे।
- आरती के बाद चालीसा पढे।
- शाम के समय माँ बगला मुखी की कथा का पाठ करना चाहिए।
बगला मुखी माता की पूजा के फायदे -
बगला मुखी माता की पूजा करने से निम्नलिखित फायदे होते है-
- जो माँ की पूजा करता है, वह मोक्ष और भोग दोनों ही पा सकता है।
- साधक की वाणी और अधिक प्रभावशाली हो जाती है।
- माता की पूजा करने से शत्रु-बाधाओं से रक्षा की मान्यता है और साथ ही साथ वाद विवाद मे भी विजय प्राप्त होती है।
- पूजा करने वाले व्यक्ति की समस्त प्रकार की बाधाये दूर होने की मान्यता है।
- घर मे सुख शांति और धन धान्य मे वृद्धि होती है
माँ बगलामुखी कौन हैं?
माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। उन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि पीला रंग उन्हें अत्यंत प्रिय माना गया है। मान्यता है कि माँ अपने भक्तों की वाणी को शक्ति देती हैं और विवाद, मुकदमे या शत्रु-बाधाओं जैसी परिस्थितियों में आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ने का बल प्रदान करती हैं।
इसी कारण कई लोग कोर्ट-कचहरी के मामलों, प्रतियोगी परीक्षाओं, राजनीति और व्यापार से जुड़ी चुनौतियों के समय माँ बगलामुखी की उपासना और हवन कराते हैं।
बगलामुखी पूजा और हवन कब कराना शुभ माना जाता है?
परंपरा में बगलामुखी जयंती (वैशाख शुक्ल अष्टमी), चैत्र और शारदीय नवरात्रि तथा गुप्त नवरात्रि को माँ की उपासना के लिए विशेष शुभ माना जाता है। इसके अलावा मंगलवार और शनिवार को भी कई साधक माँ की पूजा करते हैं। यदि आप किसी विशेष कार्य के लिए हवन कराना चाहते हैं, तो पंचांग और कुंडली देखकर शुभ मुहूर्त तय किया जाता है। मुहूर्त के लिए आप पंडित जी से पहले बात कर सकते हैं।
बगलामुखी हवन की विधि
बगलामुखी हवन परंपरा के अनुसार इन चरणों में किया जाता है। पंडित जी के मार्गदर्शन और स्थान की परंपरा के अनुसार क्रम में थोड़ा अंतर हो सकता है:
- संकल्प और गणेश पूजन: यजमान संकल्प लेकर भगवान गणेश का पूजन करते हैं।
- कलश स्थापना: पीले वस्त्र और पीले पुष्पों के साथ कलश स्थापित किया जाता है।
- माँ बगलामुखी का आवाहन और पूजन: माँ को पीला चंदन, हल्दी, पीले पुष्प और पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।
- मंत्र जाप: पंडित जी माँ के मंत्रों का जाप करते हैं। मान्यता है कि बगलामुखी मंत्र का जाप योग्य गुरु या पंडित के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।
- हवन: हवन कुंड में विशेष हवन सामग्री से आहुतियाँ दी जाती हैं।
- पूर्णाहुति, आरती और प्रसाद: अंत में पूर्णाहुति, आरती और प्रसाद वितरण के साथ अनुष्ठान पूर्ण होता है।
पूजा में उपयोग होने वाली सामान्य सामग्री
बगलामुखी पूजा में पीले रंग की वस्तुओं का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार इसमें पीले वस्त्र, पीले पुष्प, हल्दी, पीली सरसों, चने की दाल या बेसन के लड्डू, पीला चंदन, केसर, फल और हवन सामग्री का उपयोग होता है। साधक के लिए हल्दी की माला और पीला आसन भी शुभ माना जाता है। पूजा तय होने पर सामग्री की पूरी सूची पंडित जी आपको बता देते हैं।
उज्जैन में बगलामुखी पूजा क्यों कराएँ?
उज्जैन तंत्र और साधना की प्राचीन भूमि मानी जाती है। यहाँ भगवान महाकालेश्वर की उपस्थिति और पवित्र शिप्रा नदी के कारण श्रद्धालु इस नगरी में अनुष्ठान कराना शुभ मानते हैं। पंडित मंगलेश शर्मा जी लंबे अनुभव के साथ बगलामुखी पूजा और हवन विधि-विधान से कराते हैं।
यदि आप किसी अन्य ग्रह शांति के लिए भी पूजा कराना चाहते हैं, तो मंगल शांति पूजा, गुरु चांडाल दोष पूजा, नवग्रह शांति पूजा और कालसर्प दोष पूजा की जानकारी भी देख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए संपर्क पेज से या सीधे फोन पर पंडित जी से बात करें।
बगलामुखी पूजा से जुड़े सामान्य प्रश्न
बगलामुखी पूजा में पीले रंग का क्या महत्व है?
माँ बगलामुखी को पीताम्बरा कहा जाता है, इसलिए पूजा में पीले वस्त्र, पीले पुष्प और हल्दी का प्रयोग शुभ माना जाता है।
क्या यह पूजा घर से भी कराई जा सकती है?
पूजा किस प्रकार और कहाँ होगी, यह आपकी सुविधा के अनुसार पंडित जी से फोन पर तय किया जा सकता है।
पूजा के लिए कौन-सी जानकारी चाहिए होती है?
आम तौर पर यजमान का नाम, गोत्र, पूजा का उद्देश्य और संभावित तिथि बतानी होती है।
पूजा में कितना समय और खर्च लगता है?
समय और खर्च पूजा के स्वरूप, पंडितों की संख्या और सामग्री पर निर्भर करते हैं। पंडित जी बुकिंग के समय स्पष्ट जानकारी देते हैं।
बुकिंग कैसे करें?
नीचे दिए बटन पर क्लिक करके या 9827265140 पर कॉल करके पंडित जी से सीधे बात करें।
Book Your Bagla Mukhi Mata Puja
अगर आप उज्जैन मे बगलामुखी माता की पूजा करवाना चाहते है, तो आप ज्योतिषाचार्य मंगलेश शर्मा जी से संपर्क कर सकते है। पंडित जी के पास वर्षभर बगला मुखी माता की पूजा के लिए लोग आते है, और अपनी समस्याओ और बाधाओ से छुटकारा पाते है। अगर आप भी दोष से हो रही समस्याओ से परेशान है और समस्या के समाधान के लिए पूजा करवाना चाहते है, तो नीचे दी गई बटन पर क्लिक करके पंडित जी से बात कर सकते है।