नाड़ी दोष और भकूट दोष कब नहीं लगता? काट और उपाय
नाड़ी दोष और भकूट दोष का परिहार यानी इनके कटने के नियम विवाह के गुण मिलान में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले प्रश्नों में हैं। अष्टकूट मिलान के कुल 36 गुणों में नाड़ी के 8 और भकूट के 7 गुण होते हैं। इसलिए जब इन दोनों में से कोई शून्य आता है, तो अक्सर परिवार घबरा जाते हैं और रिश्ता रोकने की बात करने लगते हैं।
शास्त्रीय परंपरा में इन दोनों दोषों के साथ कई अपवाद भी बताए गए हैं। इस लेख में वही अपवाद सरल भाषा में समझाए गए हैं। ध्यान रखें कि अलग-अलग ग्रंथ और परंपराएं हर बात पर एकमत नहीं हैं। किसी विवाह का निर्णय केवल गुणों की संख्या से नहीं, दोनों की पूरी कुंडली देखकर और परिवार की सहमति से लेना बेहतर माना जाता है।
नाड़ी दोष क्या है
सत्ताईस नक्षत्र तीन नाड़ियों में बांटे गए हैं: आदि, मध्य और अंत्य। वर और वधू की नाड़ी अलग-अलग हो तो नाड़ी कूट के पूरे 8 गुण मिलते हैं। दोनों की नाड़ी एक ही हो, तो इसे एकनाड़ी कहते हैं और इसमें 0 गुण मिलते हैं। इसी को नाड़ी दोष कहा जाता है।
| नाड़ी | प्रकृति | नक्षत्र |
|---|---|---|
| आदि | वात | अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद |
| मध्य | पित्त | भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तराभाद्रपद |
| अंत्य | कफ | कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती |
यहां नाड़ी की गिनती जन्म के चंद्र नक्षत्र से होती है। इसलिए अपना जन्म नक्षत्र ठीक से जानना पहला कदम है।
नाड़ी दोष कब नहीं माना जाता
मुहूर्त चिंतामणि जैसे ग्रंथों की परंपरा में नाड़ी दोष के कई परिहार बताए गए हैं। इनमें से जो मान्य हों, वे आपकी परंपरा और ज्योतिषी की राय पर निर्भर करते हैं।
- नक्षत्र एक, राशि अलग: दोनों का चंद्र नक्षत्र समान हो पर चंद्र राशियां अलग हों, तो नाड़ी दोष लागू नहीं माना जाता।
- राशि एक, नक्षत्र अलग: चंद्र राशि समान हो पर नक्षत्र अलग हों, तब भी यही अपवाद बताया गया है।
- विशेष नक्षत्र: कुछ ग्रंथ रोहिणी, आर्द्रा, मघा, पुष्य, विशाखा, श्रवण, भरणी और उत्तराभाद्रपद में एकनाड़ी का दोष नहीं मानते।
- राशि या नवांश स्वामियों की मित्रता: दोनों की चंद्र राशियों के स्वामी मित्र या सम हों, या नवांश स्वामी मित्र हों, तो भी दोष घटा हुआ माना गया है।
कुछ परंपराएं नाड़ी दोष को विशेष रूप से ब्राह्मण वर्ण के लिए प्रमुख मानती हैं, जबकि अन्य उसे सभी पर समान रूप से देखती हैं। इसलिए एक ही कुंडली पर अलग ज्योतिषियों की राय अलग हो सकती है।
भकूट दोष क्या है
भकूट में दोनों की चंद्र राशियों के बीच की दूरी देखी जाती है। इसके अधिकतम 7 गुण हैं। राशियों के बीच 6-8 (षडाष्टक), 2-12 (द्विर्द्वादश) या 5-9 (नवपंचक) का संबंध हो, तो भकूट कूट में शून्य गुण मिलते हैं। परंपरा में इसे भकूट दोष कहा जाता है।
भकूट दोष कब नहीं माना जाता
- एक ही राशि स्वामी: दोनों चंद्र राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो। जैसे मेष और वृश्चिक (दोनों के स्वामी मंगल) या वृषभ और तुला (दोनों के स्वामी शुक्र) का 6-8 संबंध।
- राशि स्वामी मित्र हों: दोनों राशियों के स्वामी परस्पर मित्र हों, तो दोष को निष्फल माना जाता है। यह सबसे अधिक बताया जाने वाला परिहार है।
- 2-12 का अपवाद: मकर और कुंभ जैसी राशियां 2-12 में आती हैं, पर दोनों के स्वामी शनि हैं, इसलिए यहां दोष नहीं माना जाता।
- अन्य कूट मजबूत हों: कई ज्योतिषी ग्रह मैत्री और अन्य कूटों में अच्छे गुण तथा समग्र कुंडली की स्थिति भी देखते हैं।
नवपंचक (5-9) को लेकर कुछ परंपराएं अधिक उदार हैं और इसके लिए भी अपवाद बताती हैं। यहां भी निर्णय जन्म कुंडली की पूरी जांच के बाद ही होना चाहिए।
नाड़ी और भकूट दोष में अंतर
| बिंदु | नाड़ी दोष | भकूट दोष |
|---|---|---|
| कूट के गुण | 8 | 7 |
| किस पर आधारित | चंद्र नक्षत्र की नाड़ी | दोनों चंद्र राशियों की दूरी |
| दोष कब बनता है | दोनों की नाड़ी एक हो | राशियां 6-8, 2-12 या 5-9 पर हों |
| प्रमुख परिहार | नक्षत्र या राशि का भेद, नवांश या राशि स्वामी की मित्रता | एक राशि स्वामी या मित्र राशि स्वामी |
गुण मिलान में दोष आए तो क्या करें
- पहले जन्म तिथि, समय और स्थान सही हैं या नहीं, यह जांचें। छोटी चूक से नक्षत्र या राशि बदल सकती है।
- किसी अनुभवी ज्योतिषी से दोनों की पूरी कुंडली दिखवाएं, केवल ऑनलाइन गुण संख्या पर निर्णय न लें।
- ऊपर बताए परिहार में से कौन-से आपके मामले में लागू होते हैं, यह पूछें।
- दोनों परिवार आपसी सहमति और खुलकर बातचीत से निर्णय लें। कोई भी आपको डराकर महंगी पूजा के लिए बाध्य न करे।
यदि दोष लागू हो और परिवार शांति के लिए परंपरागत पूजा कराना चाहे, तो यह आस्था पर निर्भर है। मांगलिक पक्ष के लिए हमारा मांगलिक लड़के की शादी के उपाय वाला लेख उपयोगी रहेगा, और विवाह बाधा निवारण पूजा का विवरण भी देख सकते हैं।
कुंडली मिलान और परामर्श के लिए आप हमारे उज्जैन के ज्योतिषी पंडित मंगलेश शर्मा से बात कर सकते हैं: कॉल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या नाड़ी दोष होने पर विवाह नहीं करना चाहिए?
ऐसा कोई एक नियम सभी के लिए नहीं है। शास्त्रों में नाड़ी दोष के कई परिहार बताए गए हैं। कुंडली में उनमें से कोई लागू हो, तो कई ज्योतिषी दोष को निष्फल मानते हैं। अंतिम निर्णय पूरी कुंडली देखकर लें।
भकूट दोष कितने प्रकार का होता है?
राशियों की दूरी के आधार पर तीन प्रकार माने जाते हैं: षडाष्टक (6-8), द्विर्द्वादश (2-12) और नवपंचक (5-9)।
अगर कुल गुण ज्यादा मिलें और नाड़ी या भकूट शून्य हो तो?
कई ज्योतिषी इस स्थिति में भी बाकी कूटों और कुंडली की ग्रह स्थिति को साथ देखते हैं। केवल कुल गुण पर निर्णय नहीं लिया जाता, पर यह भी परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।
क्या एक ही नक्षत्र में जन्मे वर-वधू का विवाह हो सकता है?
एक नक्षत्र होने पर एकनाड़ी बनती है। पर कुछ ग्रंथ राशि भेद होने पर या कुछ नक्षत्रों में दोष नहीं मानते। इसलिए अपनी कुंडली किसी जानकार को दिखाएं।
क्या नाड़ी दोष की पूजा जरूरी है?
जरूरी नहीं। यह श्रद्धा और परिवार की इच्छा का विषय है। यदि परिहार लागू हो जाता है, तो कई बार अलग पूजा की आवश्यकता नहीं बताई जाती।
मुख्य चित्र: Symphoney Symphoney, CC BY 2.0। लेख के भीतर का चित्र: Sarvika22, CC BY-SA 4.0। क्रॉप और रिसाइज किया गया है तथा हिन्दी शीर्षक जोड़ा गया है।