कालसर्प पूजा मुहूर्त उज्जैन

कालसर्प दोष पूजा मुहूर्त अप्रैल 2026: पूजा की तिथियाँ और लाभ

कालसर्प दोष की स्थिति में व्यक्ति को जीवन में अचानक बाधाएँ, मानसिक तनाव, करियर में रुकावट और पारिवारिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है। इन प्रभावों को संतुलित करने के लिए अप्रैल माह में शुभ मुहूर्त देखकर कालसर्प दोष पूजा कराना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

विशेष रूप से उज्जैन जैसे तीर्थ स्थान पर यह पूजा अधिक प्रभावशाली मानी जाती है, क्योंकि यहाँ स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्थल है। अप्रैल 2026 में शुभ मुहूर्त पर कालसर्प दोष पूजा उज्जैन में कराना जीवन की रुकावटों को कम करने का एक प्रभावी आध्यात्मिक उपाय माना जाता है।

अप्रैल 2026 में कालसर्प दोष पूजा के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से है?

अप्रैल महीना आध्यात्मिक साधना और शिव उपासना के लिए अनुकूल माना जाता है। अप्रैल में कालसर्प पूजा मुहूर्त विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:

  • अमावस्या तिथि: अमावस्या राहु-केतु शांति के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
  • सोमवार: भगवान शिव का दिन होने के कारण कालसर्प शांति के लिए श्रेष्ठ।
  • प्रदोष काल: संध्याकाल का समय शिव पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह सूर्योदय से पहले का समय आध्यात्मिक साधना हेतु श्रेष्ठ होता है।

अप्रैल माह में अमावस्या, नाग पंचमी तिथि (यदि संयोग बने), सोमवार और शिवरात्रि के दिन विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

कालसर्प दोष पूजा क्या है इसका क्या महत्व है?

कालसर्प दोष पूजा एक वैदिक ज्योतिषीय अनुष्ठान है, जो तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित हों। इस स्थिति को कालसर्प दोष कहा जाता है। माना जाता है कि यह दोष जीवन में बार-बार बाधाएँ, मानसिक तनाव, करियर में रुकावट, विवाह में देरी और आर्थिक उतार-चढ़ाव उत्पन्न कर सकता है।

इस दोष के प्रभाव को कम करने और ग्रहों की शांति के लिए विशेष विधि से पूजा, मंत्र जाप और हवन कराया जाता है, जिसे कालसर्प दोष पूजा कहा जाता है।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का विशेष महत्व

1. महाकाल की नगरी में पूजा का प्रभाव

उज्जैन में भगवान शिव को “महाकाल” के रूप में पूजा जाता है। शिव को ग्रहों का अधिपति माना गया है, इसलिए यहाँ की गई कालसर्प शांति अधिक फलदायी मानी जाती है।

2. पवित्र क्षिप्रा तट

क्षिप्रा नदी के तट पर स्नान और संकल्प लेकर पूजा करने से दोष शांति में सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है।

कालसर्प दोष पूजा की प्रभावी विधि क्या है?

अप्रैल माह में निर्धारित मुहूर्त पर पूजा निम्न प्रकार से की जाती है:

  1. संकल्प और गोत्र उच्चारण
  2. गणेश पूजन
  3. नवग्रह पूजन
  4. राहु-केतु शांति मंत्र जाप
  5. रुद्राभिषेक
  6. नाग देवता पूजन
  7. हवन और पूर्णाहुति

पूजा सामान्यतः 2 से 3 घंटे तक चलती है।

कालसर्प दोष पूजा कराने के लाभ क्या-क्या मिलते है?

  • करियर में स्थिरता
  • विवाह संबंधी बाधाओं में कमी
  • मानसिक शांति
  • आर्थिक प्रगति
  • परिवार में सामंजस्य
  • अचानक आने वाली बाधाओं में कमी

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का खर्च कितना आता है?

अप्रैल 2026 में कालसर्प दोष पूजा का खर्च स्थान, पंडितों की संख्या और अनुष्ठान की विस्तृत विधि पर निर्भर करता है। सामान्यतः यह ₹2,000 से ₹5,000 या उससे अधिक तक हो सकता है। पूजा खर्च पंडित जी और स्थान के अनुसार ऊपर नीचे हो सकता है सटीक पूजा खर्च जानने के लिए आज ही अनुभवी पंडित मंगलेश शर्मा जी से संपर्क करें।

कालसर्प दोष पूजा से पहले क्या करें?

  • कुंडली की सही जाँच करवाएँ
  • शुभ मुहूर्त निश्चित करें
  • व्रत और सात्विक आहार रखें
  • पूजा के दिन काले या गहरे नीले वस्त्र पहनने से बचें
  • श्रद्धा और पूर्ण विश्वास के साथ संकल्प लें

कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग उज्जैन में कैसे की जाती है?

अप्रैल 2026 में शुभ मुहूर्त पर कालसर्प दोष पूजा कराना जीवन की रुकावटों को कम करने का एक प्रभावी आध्यात्मिक उपाय माना जाता है। उज्जैन में पूजा की बुकिंग के लिए वहाँ के योग्य पंडित जी से नीचे दिये गए नंबर पर संपर्क करें और पूजा बुक करें।

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