कालसर्प पूजा मुहूर्त और तिथि जून 2026

कालसर्प पूजा मुहूर्त और तिथि: शुभ दिन, उपाय और जानकारी

कालसर्प दोष निवारण पूजा मुहूर्त

क्या आपकी कुंडली में भी कालसर्प दोष बन रहा है और जीवन में बार-बार रुकावट, मानसिक तनाव, करियर समस्या या विवाह में देरी हो रही है, तो कालसर्प दोष शांति पूजा कराना इस दोष का एक उत्तम उपाय हो सकता है। अमावस्या, सोमवार और नाग पंचमी जैसे शुभ दिनों पर यह पूजा कराने की परंपरा है, और आप पंडित जी से आने वाली सही तिथि पूछ सकते हैं।

कालसर्प दोष निवारण के लिए शुभ मुहूरत और तिथि की जानकारी के लिए उज्जैन के श्रेष्ठ पंडित मंगलेश शर्मा जी से संपर्क करें और उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा पूरी विधि के साथ सफलता से सम्पन्न कराएँ। पूजा के बारें में अधिक जानकारी के लिए अभी संपर्क करें।

कालसर्प दोष क्या है और इसकी शांति पूजा क्यों कराई जाती है?

शास्त्रों के अनुसार कालसर्प योग तब बनता है जब कुंडली में सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। इसे कुंडली का एक योग माना जाता है, जिसके कारण कुछ लोगों को जीवन में बार-बार रुकावट या मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। शांति पूजा श्रद्धा से इसके समाधान का एक पारंपरिक उपाय मानी जाती है।

माना जाता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर राहु-केतु की शांति और ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा में सहायता मिलती है। पंचमी तिथि और नाग पंचमी पर सर्प देवताओं की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

कालसर्प दोष पूजा के शुभ मुहूर्त क्या हैं? यह पूजा कब की जाती है?

कालसर्प दोष पूजा के लिए कुछ विशेष तिथियाँ और दिन शुभ माने जाते हैं:

नीचे दी गई जानकारी हर माह के लिए सामान्य रूप से उपयोगी है। मुहूर्त हर व्यक्ति की कुंडली के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए पूजा बुक करने से पहले पंडित जी से आने वाली सही तिथि की पुष्टि कर लें।

अमावस्या (Amavasya) – सबसे महत्वपूर्ण दिन

  • हर माह की अमावस्या तिथि
    अमावस्या के दिन राहु-केतु की शांति के लिए पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से मन को शांति और श्रद्धा को बल मिलता है। आने वाली अमावस्या की सटीक तिथि पंडित जी से पूछ लें।

सोमवार (भगवान शिव का दिन)

  • हर सोमवार – सुबह स्नान के बाद शिव पूजन
  • महामृत्युंजय मंत्र का जाप
  • शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक
  • बेलपत्र और सफेद पुष्प अर्पित करना
  • जरूरतमंद को दान देना

सोमवार भगवान शिव का दिन है। श्रद्धालु इस दिन शिव आराधना करके कालसर्प दोष की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं, और इसे मन को शांत रखने वाला उपाय माना जाता है।

नाग पंचमी से संबंधित प्रभावी तिथि (यदि पड़ती हो)

नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को आती है। नाग पूजा और शिव पूजा इस दोष की शांति के उपायों में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस वर्ष की तिथि के लिए पंडित जी से पूछ लें।

विशेष नक्षत्र (Nakshatra Based Muhurat)

परंपरा में निम्न नक्षत्रों में पूजा करना शुभ माना गया है:

  • अश्लेषा नक्षत्र
  • मूल नक्षत्र
  • श्रवण नक्षत्र

ये नक्षत्र राहु-केतु से संबंधित माने जाते हैं, इसलिए परंपरा में इन दिनों की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है।

कालसर्प दोष पूजा के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त (4:30 AM – 6:00 AM)
  • प्रातः काल (6:00 AM – 9:00 AM)
  • या पंडित द्वारा बताए गए विशेष मुहूर्त

कालसर्प पूजा राहु काल और अशुभ समय में पूजा करने से बचें।

कालसर्प दोष की शांति के लिए घर पर कौन-से उपाय किए जा सकते हैं?

जो लोग मंदिर नहीं जा सकते, वे श्रद्धा से ये सरल उपाय कर सकते हैं:

  1. रोज ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
  2. नाग पंचमी के दिन दूध और चांदी का नाग जोड़ा शिवलिंग पर चढ़ाएं।
  3. पीपल के पेड़ को शनिवार को जल चढ़ाएं और 11 नारियल बहते जल में प्रवाहित करें।
  4. काले तिल, सरसों का तेल और लोहे की वस्तुएं शनिवार को दान करें।
  5. हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।

कालसर्प दोष पूजा कहाँ कराएं?

भारत में कालसर्प दोष पूजा के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है:

  • उज्जैन
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

यहाँ भगवान शिव की विशेष कृपा मानी जाती है और राहु-केतु दोष शांति के लिए यह स्थान अत्यंत प्रभावी है। यदि आप भी कालसर्प पूजा के लिए स्थान की तलाश में है तो उज्जैन सबसे उत्तम है। नीचे दिये गए नंबर पर संपर्क करें और पूजा के लिए पंडित जी से जानकारी प्राप्त करें।

कालसर्प दोष पूजा की विधि क्या है?

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा पूरे नियम और विधि के साथ कराई जाती है। इसकी प्रक्रिया पर इस प्रकार होती है:

  1. सबसे पहले संकल्प (नाम, गोत्र, जन्म विवरण) पंडित जी द्वारा दिलाया जाता है।
  2. गणेश पूजन करके पूजा प्रारम्भ की जाती है।
  3. नवग्रह शांति पूजा सम्पन्न कराई जाती है।
  4. राहु-केतु मंत्र जाप किए जाते है।
  5. नाग देवता पूजन कराया जाता है।
  6. रुद्राभिषेक पूरी विधि के साथ कराया जाता है।
  7. हवन पूरे मंत्रो के साथ सम्पन्न कराया जाता है।
  8. पूर्णाहुति अंत में की जाती है।

कालसर्प दोष पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

  • जीवन की बाधाओं में मानसिक संबल मिलता है
  • करियर के लिए धैर्य और स्थिरता का भाव बढ़ता है
  • विवाह से जुड़ी चिंता में मन को शांति मिलती है
  • मानसिक शांति मिलती है
  • पूजा के बाद कई लोग मन में हल्कापन और विश्वास महसूस करते हैं।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का खर्च कितना होता है?

पूजा प्रकारअनुमानित खर्च
सामान्य पूजा₹2,000 – ₹3,000
हवन सहित पूजा₹3,000 – ₹4,000
विस्तृत अनुष्ठान₹5,000+

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का खर्च पूजा विधि और दोष के प्रकार व जटिलता पर निर्भर करता है। ऊपर दिया गया खर्च अनुमानित है, पूजा का सटीक खर्च जानने के लिए पंडित मंगलेश शर्मा जी से संपर्क करें।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग के लिए संपर्क कैसे करें?

कालसर्प दोष की शांति के लिए अमावस्या और सोमवार जैसे शुभ दिन परंपरा में बताए गए हैं। यदि पूजा उज्जैन जैसे पवित्र स्थान पर पूरी विधि से कराई जाए, तो श्रद्धालु इसे अपने लिए सुखद और संतोषजनक अनुभव मानते हैं। आने वाली तिथि के लिए पंडित जी से संपर्क करें।

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