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कालसर्प दोष की पूजा कहाँ होती है?

कालसर्प दोष की पूजा कहाँ होती है? कालसर्प दोष पूजा के लिए कई सारे स्थानो को विशेष महत्व दिया जाता है, लेकिन सबसे सर्वश्रेष्ठ स्थान का दर्जा उस स्थान को दिया जाता है जहा से जातक को कालसर्प दोष निवारण पूजा कराने के तुरंत बाद जल्द से जल्द कालसर्प दोष से मुक्ति मिल सके, इस लेख के माध्यम से हम आपको बताने वाले है की कालसर्प दोष की पूजा कहाँ होती है और इस पूजा के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ स्थान कौनसा है।

जिस प्रकार से हम सभी जानते है की कालसर्प दोष को एक बहुत ही घातक व खतरनाक योग माना जाता है अगर कालसर्प दोष किसी मनुष्य की कुंडली मे आ जाए तो उनका जीवन सम्पूर्ण रूप से बदल जाता है। वह अपने जीवन मे कई सारी समस्याओ का सामना करते है और सदैव ही परेशानी व चिंता मे उनका दैनिक जीवन चलता रहता है।

ज्योतिषी शस्त्र के अनुसार माना जाता है की किसी जातक के द्वारा पूर्वजन्म मे किए गए किसी पाप या घोर अपराध के फलस्वरूप उस जातक की कुंडली मे कालसर्प दोष परिलक्षित होता है। कालसर्प दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में कई चुनौतियां आती हैं, जिससे व्यक्ति काफी परेशान रहता है। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए काल सर्प दोष निवारण पूजा की जाती है। अब भी बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें यह नहीं पता कि कालसर्प दोष पूजा कहां होती है।

कालसर्प दोष की पूजा कहाँ-कहाँ होती है

कालसर्प दोष की पूजा कहाँ होती है?

भारत मे केवल कुछ प्रमुख स्थानो पर ही कालसर्प दोष निवारण की पूजा की जाती है। 

कालसर्प दोष की पूजा ब्रह्मकपाली (उत्तराखंड) मे, त्रिजुगी नारायण मंदिर (उत्तराखंड)उज्जैन (मध्यप्रदेश), नासिक (महाराष्ट्र)प्रयाग (उत्तरप्रदेश)त्रीनागेश्वरम वासुकी नाग मंदिर (तमिलनाडु) आदि जगहों पर होती है। 

मध्य प्रदेश के उज्जैन को कालसर्प दोष निवारण पूजा के लिए एक विशेष स्थान माना जाता है। क्योंकि यहां भगवान शिव कालो के काल यानि कि महाकाल के रूप में विराजमान हैं। इसीलिए उज्जैन में कालसर्प दोष की पूजा करने से कालसर्प दोष से शीघ्र ही मुक्ति मिल सकती है।

यदि कालसर्प दोष को समय रहते समाप्त नहीं किया गया, तो यह व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकता है, जिससे मनुष्य को वित्तीय, मानसिकशारीरिक समस्याओ का सामना करना पड सकता है।

कालसर्प दोष निवारण के लिए उज्जैन को विशेष महत्व क्यो?

कालसर्प दोष की पूजा कहाँ होती है?

जिस प्रकार से हम सभी जानते है की कालसर्प दोष निवारण पूजा, कालसर्प दोष के दुष्प्रभावो को कम करने के लिए की जाती है, जिससे की जातक के दैनिक जीवन मे सुख व शांति बनी रहे। माना जाता है की यदि कालसर्प दोष का निवारण ना किया जाये तो इस दोष के प्रभाव जीवन भर रहेंगे और जातक के जीवन मे कई सारी समस्याएँ आती रहेंगी, कालसर्प दोष निवारण पूजा के द्वारा ही आप इस दोष से मुक्ति पा सकते है।

उज्जैन को सभी तीर्थों मे थोड़ा उच्च स्थान का दर्जा दिया जाता है क्योकि यहाँ पर क्षिप्रा जी के तट पर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है, वैसे तो उज्जैन मे पूरे साल ही लोग कालसर्प दोष निवारण पूजा के लिए आते लेकिन सावन मास व नागपंचमी पर यह श्रद्धालुओ की भीड़ बड जाती क्योकि भगवान महाकाल के दर्शन मात्र से कई सारी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है।

हर साल लाखों लोग कालसर्प दोष और इस दोष से अपने जीवन मे होने वाली समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए यहां आते हैं। उज्जैन में कालसर्प दोष को दूर करने के लिए पूर्ण पूजा की जाती है, जिसमें कम से कम 3 घंटे का समय लगता हैं।

उज्जैन मे कैसे कराये कालसर्प दोष निवारण पूजा?

कालसर्प दोष की पूजा कहाँ होती है?

अगर आप उज्जैन मे कालसर्प दोष निवारण पूजा करवाना चाहते है, तो पंडित मंगलेश शर्मा जी से संपर्क कर सकते है, और कालसर्प दोष और इसके निवारण के बारे मे काफी अच्छे तरीके से जान सकते है। पंडित जी वैदिक अनुष्ठानों में आचार्य की उपाधि से विभूषित है, एवं सभी प्रकार के दोष एवं बाधाओ के निवारण के कार्यो को करते हुए 13 वर्षो से भी ज्यादा समय हो गया है।

पंडित जी के पास पूर्ण वर्ष लोग आते है और कालसर्प दोष निवारण पूजा करवाकर इस दोष से छुटकारा पाते है, अगर आप भी कालसर्प दोष निवारण पूजा करवाना चाहते है तो अभी नीचे गए बटन पर क्लिक कर कॉल करे और पंडित जी से बात करे।

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काल सर्प दोष पूजा के लिए कौन सी जगह अच्छी है?

कालसर्प दोष निवारण पूजा के लिए मध्यप्रदेश के उज्जैन को सबसे अच्छी जगह माना जाता है, क्योकि यहाँ कालो के काल महाकाल का विराजमान है।

उज्जैन में कालसर्प दोष की पूजा कैसे होती है?

कालसर्प दोष पूजा उज्जैन मे पूरे विधि और विधान के साथ होती है, जो की उज्जैन के प्रसिद्ध पंडित मंगलेश शर्मा जी के द्वारा की जाती है,पंडित जी के पास सभी प्रकार के दोष एवं बाधाओ के निवारण के कार्यो को करते हुए 13 वर्षो से भी ज्यादा का अनुभव है।

कुंडली में कालसर्प दोष कब बनता है?

किसी जातक की कुंडली के सारे गृह राहू और केतू के बीचों बीच आ जाते है तब उनकी कुंडली मे कालसर्प दोष योग बनता है।

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