मंगल दोष भंग के शास्त्रीय नियम: मंगल ग्रह की सतह का NASA चित्र

मंगल दोष कब नहीं लगता? शास्त्रों के साफ नियम

मंगल दोष भंग के शास्त्रीय नियम वे स्थितियां हैं जिनमें कुंडली में मंगल मांगलिक भावों में होने पर भी दोष कम या समाप्त माना जाता है। परंपरा के अनुसार लग्न, चंद्रमा या शुक्र से गिनने पर मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो मंगल दोष का विचार होता है। पर इसके साथ ही कई परिहार भी बताए गए हैं, इसलिए केवल “मांगलिक” सुनकर रिश्ता तय करना या रोक देना जल्दबाजी हो सकती है।

ध्यान रखें कि ग्रंथ और परंपराएं सभी नियमों पर एकमत नहीं हैं। कुछ में दूसरे भाव को गिना जाता है, कुछ में नहीं। यह लेख प्रचलित और बार-बार उद्धृत नियमों की सामान्य जानकारी देता है। अंतिम निर्णय के लिए दोनों की पूरी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाएं।

पहले यह देखें कि मंगल दोष बनता भी है या नहीं

मंगल की स्थिति केवल लग्न कुंडली से नहीं, तीन जगह से देखी जाती है: लग्न से, चंद्रमा से और शुक्र से। कई लोग एक कुंडली में मांगलिक दिखते हैं और बाकी में नहीं। इसलिए ऑनलाइन कैलकुलेटर की एक पंक्ति देखकर निष्कर्ष न निकालें। जन्म का समय और स्थान सही होना भी जरूरी है, क्योंकि छोटी चूक से लग्न बदल सकता है।

मंगल दोष भंग के प्रमुख शास्त्रीय नियम

नियम परंपरा में क्या माना जाता है
मंगल अपनी या उच्च राशि में मेष, वृश्चिक (स्वराशि) या मकर (उच्च) में मंगल हो, तो दोष घटा हुआ माना जाता है।
गुरु का संबंध मंगल पर गुरु की दृष्टि हो या गुरु साथ बैठा हो, तो दोष का असर कम माना जाता है।
चंद्रमा का संबंध कुछ परंपराओं में चंद्रमा की युति या दृष्टि भी दोष को शांत करने वाली बताई जाती है।
दोनों कुंडलियों में मंगल दोष वर और वधू दोनों मांगलिक हों और बल लगभग समान हो, तो दोष परस्पर संतुलित माना जाता है।
विशेष राशि और भाव कुछ ग्रंथों में चौथे भाव में मेष, सातवें भाव में कर्क या मकर, दूसरे भाव में मिथुन या कन्या के मंगल को अपवाद बताया गया है।
कर्क और सिंह लग्न इन लग्नों में मंगल योगकारक माना जाता है, इसलिए वहां दोष की चिंता कम रहती है।
गुरु ग्रह (बृहस्पति) का NASA चित्र, मंगल दोष भंग में गुरु की दृष्टि का महत्व
गुरु (बृहस्पति) ग्रह का चित्र

इन नियमों को कैसे समझें

1. स्वराशि और उच्च का मंगल

जब ग्रह अपनी राशि या उच्च राशि में होता है, तो उसे बल वाला और संयमित माना जाता है। इसी कारण कई ज्योतिषी ऐसे मंगल को कठोर दोष की श्रेणी में नहीं रखते।

2. गुरु की दृष्टि या युति

गुरु शुभ और संरक्षक ग्रह कहा गया है। मंगल पर उसकी दृष्टि को परंपरा में दोष की कठोरता कम करने वाला माना जाता है। यह परिहार सबसे अधिक बताया जाता है।

3. दोनों मांगलिक होना

यदि दोनों कुंडलियों में मंगल दोष है, तो दोनों को बराबर का मानकर परस्पर संतुलित समझा जाता है। यहां दोष की मात्रा और भाव भी देखे जाते हैं, केवल “दोनों मांगलिक हैं” कहना काफी नहीं होता।

4. उम्र और दशा

लोक मान्यता में कहा जाता है कि 28 वर्ष की आयु के बाद मंगल का असर नरम पड़ता है। यह शास्त्रीय नियम से ज्यादा परंपरागत धारणा है, इसलिए इसे एकमात्र आधार न बनाएं। चल रही महादशा और अंतर्दशा का भी असर देखा जाता है।

मांगलिक दोष सुनकर घबराएं नहीं: क्या करें

  1. जन्म तिथि, समय और स्थान दोबारा जांचें।
  2. लग्न, चंद्र और शुक्र तीनों से मंगल की स्थिति देखें।
  3. ऊपर बताए परिहारों में से कौन-सा लागू होता है, यह ज्योतिषी से पूछें।
  4. दोनों परिवार खुलकर बात करें। डर दिखाकर जल्दबाजी में महंगी पूजा न कराएं।
  5. दोष लागू भी हो, तो भी इसे ग्रह-शांति की परंपरा और आपसी समझ से संभाला जा सकता है। विवाह का निर्णय केवल इसी एक बात पर न टिकाएं।

मंगल दोष की बुनियादी जानकारी के लिए हमारा मंगल दोष क्या है लेख पढ़ें। यदि परिवार परंपरा के अनुसार पूजा कराना चाहे, तो मंगल दोष पूजा विधि की जानकारी देखें। विवाह मिलान के अन्य दोषों के लिए नाड़ी और भकूट दोष परिहार वाला लेख उपयोगी है।

कुंडली देखकर राय लेने के लिए पंडित मंगलेश शर्मा से बात करें: कॉल करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल दोष कब नहीं लगता?

परंपरा में मंगल अपनी या उच्च राशि में हो, गुरु की दृष्टि या युति हो, या दोनों कुंडलियों में समान मंगल दोष हो, तो दोष घटा हुआ माना जाता है। कुछ ग्रंथों में विशेष राशि और भाव के अपवाद भी हैं।

क्या मांगलिक की शादी गैर-मांगलिक से हो सकती है?

कई परिवार परिहार देखकर या पूरी कुंडली की जांच के बाद ऐसा करते हैं। परंपरा में कुछ लोग इसके लिए शांति पूजा भी कराते हैं। निर्णय पूरी कुंडली देखकर लें।

क्या 28 साल के बाद मंगल दोष खत्म हो जाता है?

यह लोक मान्यता है कि उम्र के साथ असर नरम पड़ता है। इसे शास्त्रीय परिहार की तरह पक्का नियम न मानें।

क्या मंगल दोष की पूजा जरूरी है?

जरूरी नहीं। यदि परिहार लागू हो जाता है, तो पूजा की आवश्यकता नहीं बताई जाती। पूजा करना आस्था और परिवार की इच्छा का विषय है।

मंगल दोष के साथ कुंडली मिलान कैसे देखें?

अष्टकूट के गुणों के साथ-साथ दोनों कुंडलियों में मंगल की स्थिति, बल और परिहार देखे जाते हैं। इसलिए गुण मिलान और मंगल दोष का अलग-अलग विचार करना चाहिए।

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