आंशिक कालसर्प दोष

अनंत कालसर्प दोष: लक्षण, प्रभाव और निवारण के अचूक उपाय | Anant Kaalsarp Dosh Remedies in Hindi

ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष को एक अत्यंत प्रभावशाली और महत्वपूर्ण दोष माना गया है। जब कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं, तब कालसर्प योग का निर्माण होता है। इनमें सबसे प्रमुख है अनंत कालसर्प दोष (Anant Kaalsarp Dosh)

यदि आपकी कुंडली के प्रथम भाव में राहु और सप्तम भाव में केतु स्थित हो, तो यह दोष बनता है। आइए जानते हैं इसके लक्षण, प्रभाव और उज्जैन जैसे तीर्थ स्थलों पर इसकी पूजा का महत्व।

अनंत कालसर्प दोष क्या है? (What is Anant Kaalsarp Dosh?)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब राहु लग्न (प्रथम भाव) में और केतु सप्तम भाव में विराजमान हो और बाकी सभी सात ग्रह इनके घेरे में हों, तो उसे अनंत कालसर्प दोष कहते हैं। प्रथम भाव व्यक्ति के व्यक्तित्व और शरीर का होता है, जबकि सप्तम भाव वैवाहिक जीवन और साझेदारी का। इसलिए यह दोष सीधा जातक के मानसिक और सामाजिक जीवन पर प्रहार करता है।

अनंत कालसर्प दोष के मुख्य लक्षण (Symptoms)

यदि आपकी कुंडली में यह दोष है, तो आपको अपने जीवन में निम्नलिखित संकेत मिल सकते हैं:

  • मानसिक अशांति: जातक हमेशा अज्ञात भय और मानसिक तनाव में रहता है।
  • निर्णय लेने में कठिनाई: सही समय पर सही फैसला न ले पाना।
  • वैवाहिक जीवन में कलह: जीवनसाथी के साथ बेवजह के विवाद और तालमेल की कमी।
  • संघर्षपूर्ण जीवन: मेहनत के बावजूद सफलता मिलने में बहुत अधिक देरी होना।
  • नींद में डरावने सपने: अक्सर सपने में सांप दिखना या ऊंचाई से गिरने का आभास होना।

अनंत कालसर्प दोष के उपाय (Remedies for Anant Kaalsarp Dosh)

घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि शास्त्रोक्त उपायों से इस दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है:

  1. महामृत्युंजय मंत्र का जाप: प्रतिदिन 108 बार “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…” मंत्र का जाप करें।
  2. शिवलिंग पर जलाभिषेक: प्रत्येक सोमवार और विशेषकर सावन के महीने में शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करें।
  3. नाग-नागिन का जोड़ा: चांदी के बने नाग-नागिन के जोड़े को बहते जल में प्रवाहित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  4. राहु-केतु दान: काले तिल, कोयला या नीले कपड़े का दान शनिवार को करें।
  5. पक्षियों को दाना: नियमित रूप से पक्षियों को सप्तधान्य (सात प्रकार का अनाज) खिलाएं।

अनंत कालसर्प दोष शांति पूजा और उज्जैन का महत्व

इस दोष के पूर्ण निवारण के लिए विद्वान पंडितों द्वारा विधि-विधान से कालसर्प दोष निवारण पूजा करवाना आवश्यक है।

पूजा के लिए उज्जैन ही क्यों?

उज्जैन को ‘महाकाल की नगरी’ कहा जाता है। यहाँ स्थित महाकालेश्वर मंदिर और शिप्रा नदी के तट (रामघाट) पर की गई पूजा का फल अनंत गुना मिलता है। उज्जैन में बहने वाली शिप्रा नदी और सिद्धवट घाट कालसर्प दोष की शांति के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।

पूजा की विधि:

  • यह पूजा आमतौर पर 2 से 3 घंटे की होती है।
  • इसमें नवग्रह शांति, राहु-केतु मंत्र जप और नाग पूजन किया जाता है।
  • पूजा के अंत में पवित्र नदी में स्नान करने का विधान है।
  • शुभ समय: नाग पंचमी, अमावस्या या ग्रहण के दिन यह पूजा करवाना सर्वश्रेष्ठ होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

अनंत कालसर्प दोष जीवन में चुनौतियां जरूर लाता है, लेकिन भगवान शिव की भक्ति और सही ज्योतिषीय उपायों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। यदि आप भी जीवन में निरंतर बाधाओं का सामना कर रहे हैं, तो किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण अवश्य करवाएं।

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